शिक्षा जगत में विभिन्न प्रकार के शिक्षक होते हैं, और उनकी भूमिकाएँ एवं कार्य भी अलग-अलग होते हैं। नीचे प्रमुख प्रकार के शिक्षकों और उनके कार्यों का वर्णन किया गया है:
1. औपचारिक शिक्षक (Formal Teacher)
- ये वे शिक्षक होते हैं जो स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जैसी औपचारिक संस्थाओं में पढ़ाते हैं।
- इनका कार्य विद्यार्थियों को पाठ्यक्रमानुसार ज्ञान देना, परीक्षा लेना, मूल्यांकन करना, और व्यक्तित्व विकास में सहयोग करना होता है।
2. अनौपचारिक शिक्षक (Informal Teacher)
- अनौपचारिक शिक्षक कोई भी हो सकता है जो औपचारिक रूप से शिक्षक न हो, जैसे माता-पिता, वरिष्ठ सहकर्मी, या कोई बड़ा भाई-बहन, जो किसी विशेष कार्य को सिखाता है।
- इनका कार्य जीवन संबंधी अनुभव साझा करना और नैतिक एवं व्यवहारिक शिक्षा देना होता है।
3. मार्गदर्शक शिक्षक/मेंटर (Mentor Teacher)
- ये शिक्षक अन्य विद्यार्थियों या नवोदित शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हैं।
- छोटों को विशेष ध्यान देना, कक्षा प्रबंधन में सहायता करना तथा व्यक्तिगत रूप से सिखाना इनका प्रमुख कार्य होता है।
4. विशेष शिक्षा शिक्षक (Special Education Teacher)
- यह वे शिक्षक हैं जो विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों (जैसे मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक कठिनाई वाले) के लिए शिक्षा प्रदान करते हैं।
- इनका कार्य ऐसी परिस्थितियों के अनुसार शिक्षण विधियों को अनुकूलित करके सभी बच्चों को सीखने का अवसर देना है।
5. प्रशिक्षक (Trainer)
- ये किसी विशेष स्किल या व्यावसायिक योग्यता का प्रशिक्षण देते हैं।
- व्यावसायिक पाठ्यक्रम, किशोर कौशल विकास या ऑन-दी-जॉब ट्रेनिंग इनकी मुख्य जिम्मेदारी है।
6. विद्यालय प्रमुख / प्रधानाचार्य (School Principal/Head Teacher)
- ये पूरे विद्यालय की शैक्षिक तथा प्रशासनिक व्यवस्था को संभालते हैं।
- शिक्षक व विद्यार्थियों का समन्वय, विद्यालय की नीति-निर्माण और गुणवत्ता को सुनिश्चित करना इनके मुख्य कार्य हैं।
7. सहायक शिक्षक/छात्र शिक्षक (Assistant/Student Teacher)
- ये वो शिक्षक होते हैं जो अभी प्रशिक्षण के दौर में होते हैं और वरिष्ठ शिक्षक की देखरेख में पढ़ाते हैं।
- इन्हें व्यावहारिक अनुभव, विषयवस्तु का विभाजन और बच्चों को वैयक्तिक रूप से सिखाने की जिम्मेदारी मिलती है[2]।
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शिक्षक के प्रमुख कार्य
- पाठ्यक्रम एवं विषयवस्तु का शिक्षण
- विद्यार्थियों का मूल्यांकन एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करना
- मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास में सहयोग देना
- विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और परामर्श देना
- स्वयं के ज्ञान और शिक्षण कौशल को लगातार अपडेट करना
- विद्यालय व समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।
शिक्षकों का समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ज्ञान, संस्कृति और नैतिकता का संचरण करते हैं।
